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‘लॉकडाउन जैसी स्थिति नहीं’, तेल बचाने की अपील पर सरकार ने अफवाहों को किया खारिज

प्रधानमंत्री द्वारा नागरिकों से खाद्य तेल, पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने तथा वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील के बाद देश में संभावित लॉकडाउन की ख़बरें फैलने लगीं। यह अपील अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए ईंधन संकट और आपूर्ति दबाव के बीच की गई थी।

हालांकि, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी  ने ऐसी आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि ‘लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं आने वाली है’। इकॉनोमिक टाइम्स के अनुसार, सरकार फिलहाल ऊर्जा बचत और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने के उपायों पर जोर दे रही है।

इस बीच, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान पर जारी युद्ध लंबा खिंचता है तो ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच भारतीय रुपया कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर तक पहुंच गया है।

तेल और उर्वरक संकट से भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव, सरकार बचाव में जुटी

अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने भारत की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब संकट काल जैसे कदम उठाकर अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाने की कोशिश कर रही है।

भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल और लगभग 50 प्रतिशत गैस आयात करता है। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है। भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना, उसके वित्तपोषण की व्यवस्था करना और रुपये की गिरावट रोकना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 20 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की है। वहीं, रुपया 2026 में एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा बन गया है और युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 5 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है।

इस बीच, भारत में खुदरा महंगाई अप्रैल में बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी, उर्वरकों की महंगाई और एल नीनो के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंका आने वाले महीनों में महंगाई को और बढ़ा सकती है।

अरावली खनन: सुप्रीम कोर्ट ने पट्टाधारकों को राहत देने से इंकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों में खनन को लेकर फिलहाल खनन पट्टा धारकों को कोई राहत देने से इंकार किया है। अदालत ने कहा कि उसे अरावली क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर ‘काफी परेशान करने वाली’ जानकारी मिल रही है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जब तक वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं होगी, तब तक किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और उससे जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों पर स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा है। इससे पहले नवंबर 2025 में अदालत ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर रोक लगाई थी।

पर्यावरणविदों ने नई परिभाषा से संरक्षण कमजोर पड़ने की आशंका जताई है।

हिमालयी क्षेत्र में बढ़ा जलवायु आपदाओं का खतरा, 2025 में 12 लाख लोग प्रभावित: आईसीआईमॉड

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईमॉड) की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में हिंदूकुश-हिमालय (एचकेएच) क्षेत्र के कम से कम चार देशों में 10 से अधिक बड़ी प्राकृतिक आपदाएं दर्ज की गईं। इन आपदाओं से करीब 12 लाख लोग सीधे प्रभावित हुए या विस्थापित हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार और चीन समेत कई देशों में भारी मानसूनी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ीं। कुछ क्षेत्रों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लॉफ़) जैसी घटनाएं भी सामने आईं।

आईसीआईमॉड ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण ‘मल्टी-हैजार्ड’ घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जहां बाढ़, भूस्खलन और सूखे जैसी आपदाएं एक-दूसरे को और गंभीर बना रही हैं। संस्था के महानिदेशक ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में आपदाओं का ओवरलैप होना घरों, बुनियादी ढांचे और जरूरी सेवाओं को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

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