जापान ने भारतीय आमों के आयात पर लगाई रोक

जापान ने भारत से आम के आयात पर रोक लगा दी है। जापानी क्वारंटीन अधिकारियों को इस साल निरीक्षण के दौरान भारत के कीट-नियंत्रण सिस्टम में खामियां मिलीं। इससे अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसे प्रीमियम भारतीय आमों के निर्यात पर असर पड़ा है। करीब 20 साल बाद जापान ने ऐसी पाबंदी लगाई है। मार्च में उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) केंद्र के निरीक्षण में फ्यूमिगेशन और डिसइन्फेक्शन प्रक्रिया में कमियां पाई गई थीं।

इसके बाद 25 मार्च 2026 के बाद जारी प्रमाणपत्र वाले आमों की खेप स्वीकार नहीं करने का फैसला लिया गया। निर्यातकों का कहना है कि इससे भारत की कृषि गुणवत्ता प्रणाली पर भी सवाल उठ सकते हैं।

यूएन जलवायु प्रस्ताव पर भारत ने मतदान से बनाई दूरी

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में जलवायु परिवर्तन पर देशों की जिम्मेदारियों से जुड़े प्रस्ताव पर भारत ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। 193-सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह प्रस्ताव बुधवार को 141 मतों के समर्थन से पारित हुआ, जबकि आठ देशों ने विरोध में मतदान किया और भारत सहित 28 देशों ने मतदान से दूरी बनाई।

‘जलवायु परिवर्तन के संबंध में देशों की जिम्मेदारियों पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) की सलाह’ शीर्षक वाले इस प्रस्ताव में जुलाई 2025 में आईसीजे द्वारा दी गई सर्वसम्मत सलाहकारी राय का स्वागत किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि आईसीजे की यह राय अंतरराष्ट्रीय कानून के मौजूदा प्रावधानों को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण और आधिकारिक योगदान मानी जाएगी।

भारत ने कहा कि यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र जलवायु फ्रेमवर्क (यूएनएफसीसीसी) की स्थापित व्यवस्था को कमजोर करता है।

भारत का कहना है कि विकसित देशों ने ऐतिहासिक रूप से ज्यादा प्रदूषण फैलाया है, इसलिए उत्सर्जन कम करने और विकासशील देशों को वित्त व तकनीक देने की बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं की होनी चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि प्रस्ताव में ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ का पर्याप्त उल्लेख नहीं है।

हीटवेव से बिजली मांग 270 गीगावॉट के रिकॉर्ड स्तर पर, सरकार ने लोगों से ‘समझदारी से बिजली इस्तेमाल’ की अपील की

रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच देश में बिजली की मांग 270 गीगावॉट से अधिक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है। कई क्षेत्रों में बिजली कटौती की स्थिति बनी हुई है, जिसके बाद सरकार ने लोगों से बिजली का सीमित और समझदारी से उपयोग करने की अपील की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

एल नीनो मौसम पैटर्न के कारण मई महीने में पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ रही है। मैन्युफैक्चरिंग और आईटी हब चेन्नई में रात के समय 40 मिनट से एक घंटे तक बिजली कटौती की शिकायतें सामने आई हैं।

दक्षिण चेन्नई के निवासी आर. हरि ने कहा, “पिछले दो दिनों से इलाके में बार-बार बिजली कटौती हो रही है। थोड़े-थोड़े अंतराल पर बिजली जा रही है, जिससे घर से काम करना मुश्किल हो गया है।”

ऊर्जा मंत्रालय ने नागरिकों से बिजली का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मंत्रालय ने कहा कि देश में बिजली की कोई कमी नहीं है, लेकिन इसका समझदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “दिन के समय बिजली की अधिकतम मांग आमतौर पर दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच होती है। हम आवश्यकतानुसार बिजली आपूर्ति के लिए तैयार हैं, लेकिन भीषण गर्मी को देखते हुए सभी लोग बिजली का समझदारी और सावधानी से उपयोग करें।”

बिजली खपत में यह तेज़ बढ़ोतरी उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में जारी गंभीर हीटवेव के बीच दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है।

पिछले वर्ष जून 2025 में भारत में बिजली की अधिकतम मांग 242.77 गीगावॉट दर्ज की गई थी, हालांकि यह सरकार के 277 गीगावॉट के अनुमान से कम रही थी।

आसपास के इलाकों का तापमान 2 डिग्री से अधिक बढ़ा सकते हैं डेटा सेंटर: स्टडी

अमेरिका के फीनिक्स शहर में हुई एक नई स्टडी में पाया गया है कि डेटा सेंटरों से निकलने वाली अतिरिक्त गर्मी आसपास के इलाकों का तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा सकती है। गौरतलब है की डेटा सेंटर्स पर इंटरनेट, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं के लिए हजारों कंप्यूटर सर्वर चलते हैं।

शोधकर्ताओं ने बताया कि इन केंद्रों को ठंडा रखने वाली मशीनें बहुत गर्म हवा बाहर छोड़ती हैं, जिससे ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव बढ़ता है। हीट आइलैंड ऐसी स्थिति होती है, जब किसी शहर या इलाके का तापमान आसपास के क्षेत्रों से ज्यादा हो जाता है। अध्ययन के अनुसार, एक बड़े डेटा सेंटर से निकलने वाली गर्मी 40 हजार घरों से पैदा होने वाली गर्मी से भी अधिक हो सकती है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि इससे बिजली खपत और स्वास्थ्य जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं।

Website |  + posts

दो साल पहले, हमने अंग्रेजी में एक डिजिटल समाचार पत्र शुरू किया जो पर्यावरण से जुड़े हर पहलू पर रिपोर्ट करता है। लोगों ने हमारे काम की सराहना की और हमें प्रोत्साहित किया। इस प्रोत्साहन ने हमें एक नए समाचार पत्र को शुरू करने के लिए प्रेरित किया है जो हिंदी भाषा पर केंद्रित है। हम अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद नहीं करते हैं, हम अपनी कहानियां हिंदी में लिखते हैं।
कार्बनकॉपी हिंदी में आपका स्वागत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.