बाढ़-भूस्खलन से भारत में सैकड़ों मरे, जानकारों ने दी जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव की चेतावनी
बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं से पिछले पखवाड़े भारत में अलग-अलग जगह कुल
बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं से पिछले पखवाड़े भारत में अलग-अलग जगह कुल
इस श्रंखला के पहले हिस्से में आपने पढ़ा कि कैसे पर्यावरण के लिहाज़ से संवेदनशील
चालू मानसून सीजन में 13 जून से 25 जुलाई के दौरान प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं
सोमवार को प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन के कारण स्विटज़रलैंड
उत्तराखंड में झीलों की नगरी नैनीताल और उसके आसपास का इलाका कई वजहों से संकट
अब तक ये माना जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन पलायन को बढ़ा रहा है
बढ़ता हुआ ओजोन का स्तर और तापमान न केवल सोयाबीन बल्कि बहुत सारे फसलों की
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नई नीतियां बनाई जा रही हैं। जीवाश्म ईंधन पर
जानकार बताते हैं कि 15 जुलाई तक बारिश न होना बेहद असामान्य, यह गंभीर सूखे का
सरकार ने जिन 67 कोयला खदानों को नीलामी के लिये खोला उनमें से 48 खदानों