
सामान्य से कमजोर रहेगा मानसून, होगी 90% वर्षा: आईएमडी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस साल जून से सितंबर के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार देश में इस बार दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 90 प्रतिशत वर्षा हो सकती है। एलपीए का मतलब किसी क्षेत्र में 30 से 50 वर्षों के दौरान हुई औसत बारिश से होता है। भारत के लिए यह औसत 87 सेंटीमीटर है।
आईएमडी के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत में सामान्य बारिश होने की संभावना है, जबकि बाकी हिस्सों में कम वर्षा हो सकती है।
मौसम विभाग ने कहा कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित हो रही है। अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है, जिसमें समुद्र का तापमान बढ़ने से भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों को कम बारिश और मौसम संबंधी चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा है।
आंधी-बारिश से कई राज्यों में तबाही, तापमान में गिरावट
मानसून से पहले देश के कई राज्यों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि राजस्थान में भी बारिश और धूलभरी आंधी की गतिविधियां बढ़ने लगी हैं।
पश्चिम बंगाल में कोलकाता और दक्षिण बंगाल के कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण सात लोगों की मौत हो गई। कई जगह पेड़ उखड़ गए, सड़कें जलमग्न हो गईं और हवाई व रेल सेवाएं प्रभावित रहीं।
उत्तराखंड के धनोल्टी में भीषण तूफान से ईको पार्क और कई इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा। वहीं, उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में आंधी के दौरान निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरने से छह मजदूरों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में लू से 100 से अधिक मौतें, बिजली आपूर्ति और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
भीषण गर्मी और लू के कारण आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जबकि पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी क्षेत्रों में पारा 48 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। ईटीवी भारत की रिपोर्ट में कहा गया कि तेलंगाना के वारंगल में 23 लोगों की मौत दर्ज की गई, जो क्षेत्र में सबसे अधिक है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मध्य भारत के छत्तीसगढ़ में रायपुर एयरपोर्ट पर काम कर रहे इलेक्ट्रीशियन कुबेर चंद्र साहू गर्मी के कारण बेहोश होकर छत से गिर पड़े और उनकी मौत हो गई।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2024 में तेलंगाना में हीट स्ट्रोक और सनस्ट्रोक से 116 मौतें दर्ज की गईं। हालांकि, राज्य की ‘हीटवेव एक्शन प्लान 2026’ रिपोर्ट में इसी अवधि के लिए केवल 10 मौतों का उल्लेख किया गया है। अखबार ने कहा कि 106 मौतों का यह अंतर चरम गर्मी से होने वाली मौतों की निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समान व्यवस्था की कमी को उजागर करता है। रिपोर्ट के मुताबिक अत्यधिक गर्मी से होने वाली मौतों का वास्तविक आंकड़ा आधिकारिक रिकॉर्ड में ‘अदृश्य’ रह सकता है।
आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री गोट्टिपाटी रवि कुमार ने कहा कि राज्य में बिजली की मांग में तेज़ बढ़ोतरी का मुख्य कारण बढ़ता तापमान है, जहां कई क्षेत्रों में तापमान लगभग 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर बिजली कटौती इसलिए हो रही है क्योंकि अभूतपूर्व मांग के कारण ट्रांसमिशन लाइनें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और ट्रांसफॉर्मर ओवरहीट हो रहे हैं, न कि बिजली की कमी की वजह से।
द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार रिकॉर्ड स्तर के रात के तापमान के कारण स्वास्थ्य पर असर और गंभीर होता जा रहा है। इस सप्ताह दिल्ली में पिछले लगभग 14 वर्षों की सबसे गर्म मई की रात दर्ज की गई हालांकि बीते शुक्रवार रात को तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक राजधानी में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने के बीच अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्सों में लू की स्थिति बनी रहेगी।
डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार कई क्षेत्रों में घरों को ठंडा रखने के लिए बिजली की मांग अब उद्योगों की बिजली मांग से भी अधिक हो गई है, जिससे भारत का पावर ग्रिड “अनचाहे और अनजाने क्षेत्र” में पहुंच रहा है। वहीं हिंदुस्तान टाइम्स ने कहा कि कूलिंग सुविधाओं की कमी और ‘इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन की विफलता’ भी गर्मी से होने वाली मौतों को बढ़ा रही है।
उत्तराखंड में आग की 375 घटनाएं, हिमाचल में आग को काबू करने के लिए सेना लगाई
उत्तराखंड में इस साल आग की 375 घटनाएं हुईं जिनमें चमोली ज़िला सर्वाधिक प्रभावित रहा। इस ज़िले में 133 घटनायें दर्ज की गईं और 62 हेक्टेयर से अधिक जंगल जले। ये आंकड़े 15 फरवरी और 24 मई के बीच के हैं। फरवरी मध्य से सालाना फायर सीज़न की शुरुआत मानी जाती है। जहां चमोली में 133 की घटनायें हुईं वहीं कुमाऊं के पिथौरागढ़ में अब तक 32 और नैनीताल में 13 घटनायें ही दर्ज की गईं। गढ़वाल के अन्य ज़िलों को देखें तो पौड़ी और टिहरी में 42-42 और रुद्रप्रयाग में 37 घटनायें हुईं हैं।
जंगलों आग मानवजनित ही होती है, ज़ाहिर तौर पर लोगों में जागरूकता और सख्त मॉनिटरिंग ज़रूरी है। उत्तराखंड में कुमाऊं डिवीज़न के वन अधिकारी ने कहा कि इस साल फायर सीज़न से पहले लोगों में सघन जागरूकता अभियान चलाया गया जिसका असर आग की घटनाओं में कमी के रूप में दिख रहा है।
उधर हिमाचल प्रदेश के कसौली क्षेत्र में लगी भीषण जंगल की आग पर भारतीय सेना और वायुसेना ने करीब 15 घंटे के संयुक्त अभियान के बाद काबू पा लिया। तेज हवाओं, सूखी चीड़ की पत्तियों और भीषण गर्मी के कारण आग तेजी से फैली थी, जिससे वायुसेना स्टेशन और आसपास के जंगलों को खतरा पैदा हो गया। आग बुझाने के लिए वायुसेना के Mi-17 और चिनूक हेलीकॉप्टरों ने सुखना झील से पानी भरकर ‘बांबी बकेट’ अभियान चलाया। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
वनाग्नि नियंत्रण के लिए उत्तराखंड में 1,438 क्रू स्टेशन और 40 कंट्रोल रूम सक्रिय
उत्तराखंड सरकार का कहना है कि राज्य में आग की घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक प्रबंध किये गया हैं। मुख्य वन संरक्षक और नोडल अधिकारी (वनाग्नि) सुशांत पटनायक ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि संसाधनों और तकनीक के एकीकरण से वन विभाग की आग बुझाने की क्षमता मजबूत हुई है।
पटनायक ने बताया कि वन सर्वेक्षण विभाग (Forest Survey of India) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े आग बुझाने के अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि एजेंसी सक्रिय आग की सैटेलाइट तस्वीरें हासिल कर जानकारी वन विभाग के फायर सेल को भेजती है, जिसके बाद संबंधित वन प्रभागों को लोकेशन और निर्देशांक सत्यापन के लिए भेजे जाते हैं। इससे फील्ड टीमें लक्षित तरीके से आग बुझाने का अभियान चला पाती हैं।
जमीनी स्तर पर स्थिति से निपटने के लिए विभाग ने राज्यभर में 1,438 क्रू स्टेशन और 40 कंट्रोल रूम सक्रिय किए हैं। इसके अलावा वन मुख्यालय में एकीकृत कंट्रोल और कमांड सेंटर भी स्थापित किया गया है। पटनायक ने बताया कि 5,600 फायर वॉचर्स की भी तैनाती की गई है।
पटनायक ने कहा कि सूखी चीड़ की पत्तियां, जिन्हें स्थानीय भाषा में “पिरुल” कहा जाता है, उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने का बड़ा कारण बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि पिछले फायर सीजन में 5,600 टन “पिरुल” एकत्र किया गया था, जबकि इस वर्ष विभाग ने इसका लक्ष्य बढ़ाकर 8,500 टन कर दिया है।
गीर में संदिग्ध बेबेसिया संक्रमण से एशियाई शेरों के 8 शावक मरे
गुजरात के जूनागढ़ ज़िले में गिर क्षेत्र में अब तक एशियाई शेरों के 8 शावकों (lion cubs) की मौत हो गई है।
गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने शुक्रवार को कहा कि शावकों की मौत संदिग्ध ‘बेबेसिया’ संक्रमण के कारण हुई है। ‘बेबेसिया’ (Babesia) संक्रमण टिक (किलनी) से फैलने वाला परजीवी संक्रमण है।
मोढवाडिया ने कहा कि पशु चिकित्सकों की एक टीम ने सैंपल एकत्र किए हैं जिन्हें परीक्षण के लिए गुजरात जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र में भेजा गया है। उन्होंने कहा कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर रिपोर्ट आने की उम्मीद है, जिससे पुष्टि हो जाएगी कि मौतें बेबेसिया संक्रमण के कारण हुई हैं या नहीं।
संभावित संक्रमण को रोकने के लिए अधिकारियों ने आस-पास के इलाकों के 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले शेरों को अलग कर दिया है। मोढवाडिया ने कहा कि गिर अभयारण्य और आसपास के क्षेत्रों में टिक हटाने का अभियान शुरू किया गया है।
इससे पहले भी गीर के जंगलों और अन्य अभयारण्यों में बड़े मांसाहारी वन्यजीवों में गंभीर बीमारियों के मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2018 में गुजरात के गिर नेशनल पार्क में बड़ी संख्या में एशियाई शेरों की मौत हुई थी। जांच में कई शेरों में “कैनाइन डिस्टेंपर वायरस” (CDV) और बाबेसिया संक्रमण की पुष्टि हुई थी। शुरुआती दो हफ्तों में करीब 28 शेरों की मौत दर्ज की गई थी।हालिया एशियाई शेर गणना (2025) के अनुसार, वर्तमान में गीर लैंडस्केप और आसपास के क्षेत्रों में कुल 891 एशियाई शेर हैं। यह संख्या 2020 में दर्ज 674 शेरों की तुलना में लगभग 32% अधिक है। इनमें से लगभग 394 शेर गीर नेशनल पार्क, गीर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी और उससे जुड़े संरक्षित क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि 500 से अधिक शेर अब सौराष्ट्र के अन्य इलाकों, तटीय क्षेत्रों और सैटेलाइट हैबिटैट में फैल चुके हैं।
जापान ने भारत से आम के आयात पर रोक लगा दी है। जापानी क्वारंटीन अधिकारियों को इस साल निरीक्षण के दौरान भारत के कीट-नियंत्रण सिस्टम में खामियां मिलीं। इससे अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसे प्रीमियम भारतीय आमों के निर्यात पर असर पड़ा है। करीब 20 साल बाद जापान ने ऐसी पाबंदी लगाई है। मार्च में उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) केंद्र के निरीक्षण में फ्यूमिगेशन और डिसइन्फेक्शन प्रक्रिया में कमियां पाई गई थीं।
इसके बाद 25 मार्च 2026 के बाद जारी प्रमाणपत्र वाले आमों की खेप स्वीकार नहीं करने का फैसला लिया गया। निर्यातकों का कहना है कि इससे भारत की कृषि गुणवत्ता प्रणाली पर भी सवाल उठ सकते हैं।
यूएन जलवायु प्रस्ताव पर भारत ने मतदान से बनाई दूरी
संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में जलवायु परिवर्तन पर देशों की जिम्मेदारियों से जुड़े प्रस्ताव पर भारत ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। 193-सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह प्रस्ताव बुधवार को 141 मतों के समर्थन से पारित हुआ, जबकि आठ देशों ने विरोध में मतदान किया और भारत सहित 28 देशों ने मतदान से दूरी बनाई।
‘जलवायु परिवर्तन के संबंध में देशों की जिम्मेदारियों पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) की सलाह’ शीर्षक वाले इस प्रस्ताव में जुलाई 2025 में आईसीजे द्वारा दी गई सर्वसम्मत सलाहकारी राय का स्वागत किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि आईसीजे की यह राय अंतरराष्ट्रीय कानून के मौजूदा प्रावधानों को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण और आधिकारिक योगदान मानी जाएगी।
भारत ने कहा कि यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र जलवायु फ्रेमवर्क (यूएनएफसीसीसी) की स्थापित व्यवस्था को कमजोर करता है।
भारत का कहना है कि विकसित देशों ने ऐतिहासिक रूप से ज्यादा प्रदूषण फैलाया है, इसलिए उत्सर्जन कम करने और विकासशील देशों को वित्त व तकनीक देने की बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं की होनी चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि प्रस्ताव में ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ का पर्याप्त उल्लेख नहीं है।
हीटवेव से बिजली मांग 270 गीगावॉट के रिकॉर्ड स्तर पर, सरकार ने लोगों से ‘समझदारी से बिजली इस्तेमाल’ की अपील की
रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच देश में बिजली की मांग 270 गीगावॉट से अधिक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है। कई क्षेत्रों में बिजली कटौती की स्थिति बनी हुई है, जिसके बाद सरकार ने लोगों से बिजली का सीमित और समझदारी से उपयोग करने की अपील की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
एल नीनो मौसम पैटर्न के कारण मई महीने में पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ रही है। मैन्युफैक्चरिंग और आईटी हब चेन्नई में रात के समय 40 मिनट से एक घंटे तक बिजली कटौती की शिकायतें सामने आई हैं।
दक्षिण चेन्नई के निवासी आर. हरि ने कहा, “पिछले दो दिनों से इलाके में बार-बार बिजली कटौती हो रही है। थोड़े-थोड़े अंतराल पर बिजली जा रही है, जिससे घर से काम करना मुश्किल हो गया है।”
ऊर्जा मंत्रालय ने नागरिकों से बिजली का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मंत्रालय ने कहा कि देश में बिजली की कोई कमी नहीं है, लेकिन इसका समझदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “दिन के समय बिजली की अधिकतम मांग आमतौर पर दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच होती है। हम आवश्यकतानुसार बिजली आपूर्ति के लिए तैयार हैं, लेकिन भीषण गर्मी को देखते हुए सभी लोग बिजली का समझदारी और सावधानी से उपयोग करें।”
बिजली खपत में यह तेज़ बढ़ोतरी उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में जारी गंभीर हीटवेव के बीच दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है।
पिछले वर्ष जून 2025 में भारत में बिजली की अधिकतम मांग 242.77 गीगावॉट दर्ज की गई थी, हालांकि यह सरकार के 277 गीगावॉट के अनुमान से कम रही थी।
आसपास के इलाकों का तापमान 2 डिग्री से अधिक बढ़ा सकते हैं डेटा सेंटर: स्टडी
अमेरिका के फीनिक्स शहर में हुई एक नई स्टडी में पाया गया है कि डेटा सेंटरों से निकलने वाली अतिरिक्त गर्मी आसपास के इलाकों का तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा सकती है। गौरतलब है की डेटा सेंटर्स पर इंटरनेट, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं के लिए हजारों कंप्यूटर सर्वर चलते हैं।
शोधकर्ताओं ने बताया कि इन केंद्रों को ठंडा रखने वाली मशीनें बहुत गर्म हवा बाहर छोड़ती हैं, जिससे ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव बढ़ता है। हीट आइलैंड ऐसी स्थिति होती है, जब किसी शहर या इलाके का तापमान आसपास के क्षेत्रों से ज्यादा हो जाता है। अध्ययन के अनुसार, एक बड़े डेटा सेंटर से निकलने वाली गर्मी 40 हजार घरों से पैदा होने वाली गर्मी से भी अधिक हो सकती है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि इससे बिजली खपत और स्वास्थ्य जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं।
अरावली क्षरण से दिल्ली में बढ़ रही धूल और प्रदूषण: विशेषज्ञ
दिल्ली में पिछले एक सप्ताह से वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 से 300 के बीच बना हुआ है, जो आमतौर पर सर्दियों में देखा जाता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली धूलभरी हवाएं इसका मुख्य कारण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली पर्वतमाला पहले इन हवाओं और धूल को रोकने का प्राकृतिक अवरोध का काम करती थी, लेकिन खनन, पत्थर खदानों और अतिक्रमण के कारण इसकी क्षमता कमजोर हो गई है।
खासकर अलवर और भरतपुर क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पहाड़ियों को नुकसान पहुंचा है।
एक हालिया अध्ययन के अनुसार, 2017 से 2024 के बीच अरावली क्षेत्र में निर्माण क्षेत्र 53 प्रतिशत बढ़ा। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि वनस्पति खत्म होने और मिट्टी ढीली पड़ने से धूल अब सीधे दिल्ली-एनसीआर तक पहुंच रही है, जिससे प्रदूषण और ‘डेजर्टिफिकेशन’ यानी भूमि के रेगिस्तान में बदलने का खतरा बढ़ रहा है।
नर्मदा में दूध चढ़ाने पर एनजीटी ने मांगी रिपोर्ट
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने नर्मदा नदी में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान 11 हजार लीटर दूध और 210 साड़ियां चढ़ाने के मामले में केंद्रीय और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब मांगा है। एनजीटी में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि 8 अप्रैल को सीहोर जिले के सतदेव गांव में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान यह सामग्री नदी में प्रवाहित की गई, जिससे जल और जलीय जीवों पर असर पड़ सकता है।
एनजीटी ने कहा कि फिलहाल दूध से प्रदूषण के वैज्ञानिक प्रमाण पेश नहीं किए गए हैं, लेकिन जल प्रदूषण रोकथाम कानून के तहत नदियों में प्रदूषण फैलाने वाली चीजें डालना प्रतिबंधित है। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।
प्लास्टिक खाद्य और पेय पैकेजिंग दुनिया के तटीय क्षेत्रों में सबसे आम कचरा: अध्ययन
एक नए अध्ययन में पाया गया है कि प्लास्टिक के फूड बॉक्स, बोतलें, ढक्कन और कैप दुनिया भर के समुद्री तटों पर पाए जाने वाले सबसे आम कचरे में शामिल हैं। गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार शोधकर्ताओं ने तटीय कचरे पर किए गए 5,300 से अधिक सर्वेक्षणों के आंकड़ों का विश्लेषण कर इस तरह का पहला वैश्विक अध्ययन तैयार किया। इसके लिए विषय से संबंधित 355 पूर्व अध्ययनों के आंकड़ों का उपयोग किया गया।
रिचर्ड थामसन, जो प्लाइमोथ विश्वविद्यालय (University of Plymouth) की अंतरराष्ट्रीय समुद्री कचरा अनुसंधान इकाई के संस्थापक हैं, ने कहा कि “ऐसे देशों में भी, जहां कचरा प्रबंधन की व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर है, तटों पर सबसे अधिक यही वस्तुएं पाई जाती हैं।” उन्होंने कहा कि सातों महाद्वीपों के समुद्री तटों पर इन वस्तुओं का इतनी लगातार मौजूद होना उनके लिए भी आश्चर्यजनक था।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि केवल प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध लगाने से जरूरी नहीं कि किसी देश में प्लास्टिक कचरा कम हो जाए। इसके पीछे नीतियों के कमजोर क्रियान्वयन या अन्य देशों से कचरे के आयात जैसे कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
शोध में माइक्रोप्लास्टिक या ऐसे प्लास्टिक कणों को शामिल नहीं किया गया जिन्हें पहचानना संभव नहीं था। हालांकि अध्ययन के लेखकों ने कहा कि इस तरह के अधिकांश सूक्ष्म प्लास्टिक बड़े और पहचान योग्य प्लास्टिक कचरे से ही उत्पन्न होते हैं।
एनजीटी ने राज्यों से प्रदूषण क्षतिपूर्ति फंड के उपयोग का ब्योरा मांगा
नेशनल ग्रीन ट्राईब्यूनल (एनजीटी) ने देशभर के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और प्रदूषण नियंत्रण समितियों को पर्यावरण क्षतिपूर्ति फंड के उपयोग का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में मिले फंड के खर्च और उसके ऑडिट की स्थिति की जानकारी दी जानी चाहिए। यह निर्देश 14 मई को पारित आदेश में दिया गया।
कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (केएसपीसीबी) ने हाल ही में एनजीटी को बताया था कि फंड का उपयोग नियमों के अनुसार किया जा रहा है, लेकिन खर्च का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया। बोर्ड ने अपने हलफनामे में कहा कि उसे पिछले पांच वर्षों में पर्यावरण मुआवजे के रूप में 13.6 करोड़ रुपए से अधिक प्राप्त हुए हैं।
मेरकॉम इंडिया रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) के दौरान 2.7 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता जोड़ी गई। यह पिछली तिमाही की तुलना में 25 प्रतिशत और एक साल पहले की तुलना में 125 प्रतिशत अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया कि इस बढ़ोतरी में पीएम सूर्य घर योजना की बड़ी भूमिका रही, जिसके तहत सब्सिडी, आसान स्वीकृति प्रक्रिया और राज्यों के सहयोग से घरेलू उपभोक्ताओं को बढ़ावा मिला। कुल नई क्षमता में 82 प्रतिशत हिस्सा आवासीय क्षेत्र का रहा।
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात सबसे आगे रहे। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 तक देश की कुल रूफटॉप सोलर क्षमता 23.5 गीगावाट पहुंच गई।
2035 तक ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी 35% करना आवश्यक: इरेना
अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (इरेना) ने कहा है कि दुनिया को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 2035 तक कुल ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत और 2050 तक 50 प्रतिशत से अधिक करनी होगी। एजेंसी के अनुसार, यदि ऐसा नहीं हुआ तो वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना मुश्किल होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का तेजी से विस्तार जरूरी है। साथ ही बिजली ग्रिड और बैटरी भंडारण क्षमता को भी मजबूत करना होगा। इरेना ने चेतावनी दी कि वर्तमान प्रगति पर्याप्त नहीं है। दुनिया भर में कई सौर और पवन परियोजनाओं को बिजली ग्रिड से जोड़ा जाना बाकी है। रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन, उद्योग और बिल्डिंग क्षेत्रों में बिजली-आधारित तकनीकों के इस्तेमाल से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम की जा सकती है।
2026 में भारत का ऊर्जा निवेश 170 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान: आईईए
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की रिपोर्ट के अनुसार भारत का ऊर्जा क्षेत्र में निवेश 2026 में रिकॉर्ड 170 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सौर ऊर्जा, बिजली ग्रिड और तेल रिफाइनिंग क्षेत्र में तेज निवेश के कारण होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पांच वर्षों में भारत का ऊर्जा निवेश औसतन 11 प्रतिशत सालाना बढ़ा है।
सौर ऊर्जा निवेश में 25 प्रतिशत और रिफाइनिंग निवेश में 23 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।
भारत ने 2025 में गैर-जीवाश्म स्रोतों से 50 प्रतिशत बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य समय से पांच साल पहले पूरा कर लिया। वहीं, ग्रिड आधुनिकीकरण, बैटरी स्टोरेज और परमाणु ऊर्जा में भी निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
सभी परियोजनाओं के लिए नहीं बढ़ाई जाएगी एएलएमएम नियमों में छूट की समयसीमा
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई ) ने कहा है कि सोलर पीवी (फोटोवोल्टिक) सेल के लिए एएलएमएम (एप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैनुफैक्चरर्स) सूची-2 लागू करने की समयसीमा 1 जून 2026 के बाद सभी परियोजनाओं के लिए एक साथ नहीं बढ़ाई जाएगी। एएलएमएम ऐसी सरकारी सूची है जिसमें स्वीकृत सोलर उपकरण बनाने वाली कंपनियां शामिल होती हैं।
मंत्रालय ने कहा कि 1 जून 2026 से पहले शुरू होने वाली नेट-मीटरिंग और ओपन एक्सेस परियोजनाओं को छूट मिलती रहेगी, लेकिन इसके बाद शुरू होने वाली परियोजनाओं को एएलएमएम नियम मानने होंगे। हालांकि, जिन परियोजनाओं में भूमि क्रय, वित्तीय व्यवस्था या सोलर मॉड्यूल लगाने जैसे काम हो चुके हैं, उनके लिए विशेष आधार पर समय बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
आपकी कार कर रही है आपकी जासूसी, और यह तो सिर्फ शुरुआत है
आधुनिक कारें अपने उपयोगकर्ताओं के बारे में “चौंकाने वाली मात्रा में डेटा” एकत्र कर रही हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार यह डेटा आपके वजन, चेहरे के हाव-भाव, यात्रा गंतव्य और ड्राइविंग व्यवहार तक से जुड़ा हो सकता है। कुछ मामलों में यह जानकारी आपके बीमा प्रीमियम को भी प्रभावित कर सकती है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि उपभोक्ता कुछ कदम उठाकर कंपनियों द्वारा एकत्र किए जाने वाले डेटा को सीमित कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार यदि लोग कंपनियों की लंबी और जटिल गोपनीयता नीतियां पढ़ें तो उन्हें पता चल सकता है कि कौन-कौन सी जानकारी एकत्र की जा रही है। इसमें आपकी सटीक लोकेशन, कार में आपके साथ कौन यात्रा कर रहा है, रेडियो पर क्या चल रहा है, आपने सीट बेल्ट लगाई है या नहीं, आप कितनी तेज़ गाड़ी चलाते हैं और कितनी जोर से ब्रेक लगाते हैं जैसी जानकारियां शामिल हो सकती हैं।
बीबीसी ने बताया कि कुछ कारें आपकी उम्र, वजन, नस्ल और चेहरे के भावों जैसी अप्रत्याशित जानकारियां भी एकत्र कर सकती हैं। कई वाहनों में चालक की ओर लगी आंतरिक कैमरा प्रणाली होती है और अधिकांश कारें इंटरनेट से जुड़ी होती हैं, जिससे यह डेटा वाहन चलाते समय स्वतः कंपनियों तक पहुंच सकता है, जबकि चालक को इसकी जानकारी भी नहीं होती।
ऐतिहासिक समझौता: एआई से बढ़े मुनाफे में हिस्सेदारी, सैमसंग के 62,616 कर्मचारियों को औसतन 3.1 लाख पाउंड बोनस
सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के मेमोरी चिप डिवीजन के यूनियन कर्मचारियों को एक ऐतिहासिक मुनाफा-साझेदारी समझौते के तहत औसतन 3.1 लाख पाउंड (लगभग 3.5 करोड़ रुपये) का बोनस मिलेगा। गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते उपयोग से चिप निर्माताओं के मुनाफे में हुई तेज़ बढ़ोतरी के बाद यह समझौता हुआ है।
दुनिया की सबसे बड़ी मेमोरी चिप निर्माता कंपनी सैमसंग में हड़ताल की आशंका उस समय टल गई जब दो यूनियनों ने बताया कि मतदान में हिस्सा लेने वाले 62,616 कर्मचारियों में से 74 प्रतिशत ने समझौते के पक्ष में वोट दिया।
दक्षिण कोरिया सरकार की मध्यस्थता से हुए इस समझौते के तहत सैमसंग अपने सेमीकंडक्टर डिवीजन के परिचालन लाभ (ऑपरेटिंग प्रॉफिट) का 10.5 प्रतिशत हिस्सा विशेष बोनस के रूप में चिप कर्मचारियों को देगी। इससे पिछले पांच महीनों से जारी विवाद के समाप्त होने की उम्मीद है।
टेस्ला ने भारत में लॉन्च की नई किफायती इलेक्ट्रिक कार
अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला ने भारत में अपनी नई 2026 मॉडल वाई प्रीमियम रियर-व्हील ड्राइव कार लॉन्च की है। इसकी शुरुआती कीमत 50.89 लाख रुपए रखी गई है। यह भारत में कंपनी की सबसे सस्ती कार है।
एक बार चार्ज करने पर यह कार 500 किलोमीटर तक चल सकती है और 5.9 सेकंड में 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है। कंपनी जुलाई 2026 से इसकी डिलीवरी शुरू करेगी।
टेस्ला भारत में अपने चार्जिंग नेटवर्क का भी विस्तार कर रही है। कंपनी दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और जयपुर जैसे शहरों में सुपरचार्जर और सर्विस नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी में है।
घाटा कम करने के लिए 11 दिनों में चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले पखवाड़े 11 दिनों में चौथी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार बीते सोमवार को डीजल के दाम में 2.71 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल में 2.61 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई।
हालांकि हालिया बढ़ोतरी के बावजूद इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियां अब भी भारी अंडर-रिकवरी का सामना कर रही हैं।
कई चरणों में कीमतों में कुल 7 रुपए प्रति लीटर से अधिक की बढ़ोतरी की जा चुकी है, लेकिन वित्तीय बाजार के अनुमानों के मुताबिक यह पर्याप्त नहीं है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले नुकसान की पूरी भरपाई करने और कच्चे तेल की लागत तथा खुदरा बिक्री कीमतों के बीच अंतर खत्म करने के लिए सैद्धांतिक रूप से भारत में ईंधन की कीमतों में अभी 28 से 33 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है। यानी हालिया बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों को बीते महीनों के नुकसान की भरपाई के लिए कम से कम 20 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में दोपहिया वाहनों के लिए 300 रुपए तक पेट्रोल सीमा, अफरा-तफरी रोकने की कोशिश
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के कलेक्टर ने जिले के सभी पेट्रोल पंपों को आदेश जारी कर दोपहिया वाहनों को 300 रुपए से अधिक और चारपहिया वाहनों को 1,000 रुपये से अधिक का पेट्रोल नहीं देने के निर्देश दिए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक ईंधन स्टॉक की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती। हालांकि बाद में प्रशासन ने कहा कि चारपहिया वाहनों पर लगी सीमा हटाई जाएगी।
अखबार ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा ईंधन की कमी की अफवाहों का जिक्र किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल की घबराहट में खरीदारी (panic buying) देखने को मिली। गुरुवार को राजधानी रायपुर में लंबी कतारें और अव्यवस्था की स्थिति बनी रही, हालांकि रायपुर प्रशासन ने फिलहाल किसी तरह की खरीद सीमा लागू नहीं की है।
द प्रिंट के अनुसार आदेश में कहा गया है कि “मौजूदा स्थिति और उपभोक्ताओं द्वारा अनावश्यक खरीद के कारण जमाखोरी तथा अव्यवस्था की आशंका को देखते हुए प्रतिबंध लगाए गए हैं। पेट्रोल पंप ड्रम, जरी कैन या बोतलों में पेट्रोल-डीजल नहीं बेचेंगे। निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
आदेश में यह भी कहा गया कि एम्बुलेंस सहित आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को ईंधन आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाए।
एलपीजी संकट के बीच खाना पकाने के लिए कोयला वितरण पर स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर सवाल
पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के युद्ध तथा इसके बाद ईरान और अमेरिका द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से उत्पन्न एलपीजी संकट के बीच बिहार सरकार ने घरेलू खाना पकाने के लिए कोयला वितरित करने का फैसला किया है। मोंगाबे इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बिहार सरकार के इस “असामान्य” नीतिगत फैसले ने इसकी व्यवहारिकता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों ने इस फैसले को स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों से पीछे हटने जैसा बताया है। उनका कहना है कि घरेलू खाना पकाने में कोयले के इस्तेमाल से प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। इसलिए बिहार सरकार को इसके उपयोग को लेकर सख्त दिशानिर्देश जारी करने चाहिए ताकि प्रदूषण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सके।
2027 के मध्य तक सामान्य नहीं होगा होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल प्रवाह: यूएई की सरकारी कंपनी ADNOC प्रमुख
पश्चिम एशिया का संघर्ष अभी समाप्त भी हो जाए, तब भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में 2027 की पहली या दूसरी तिमाही तक का समय लग सकता है। संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी ADNOC के प्रमुख ने यह बात कही। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने इस जलमार्ग पर व्यावहारिक रूप से नियंत्रण स्थापित कर लिया है, जो दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।
ऊर्जा कीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी ने महंगाई को और बढ़ा दिया है तथा वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंकाओं को भी गहरा किया है।
बुधवार को अटलांटिक काउंसिल के एक कार्यक्रम में ADNOC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुल्तान अल जाबेर ने कहा, “अगर यह संघर्ष कल भी समाप्त हो जाए, तब भी संघर्ष-पूर्व तेल प्रवाह के 80 प्रतिशत स्तर तक लौटने में कम से कम चार महीने लगेंगे, जबकि पूरी तरह सामान्य आपूर्ति 2027 की पहली या दूसरी तिमाही से पहले संभव नहीं होगी।”
रॉयटर्स के मुताबिक ईरान चेकपोस्ट, जांच-पड़ताल और कुछ मामलों में शुल्क लगाकर जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इज़राइल हमले शुरू होने के बाद तेहरान ने इस जलमार्ग में जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था, जिससे वास्तविक रूप से नाकेबंदी जैसी स्थिति पैदा हो गई।






