loss and damage

संकटग्रस्त देशों ने लॉस एंड डैमेज की असरदार रणनीति के लिये शोधकर्ताओं से मिलाया हाथ

दुनिया के सबसे कम विकसित देशों (एलडीसी) ने जलवायु आपदाओं से बेहतर तरीके से निपटने

तापमान वृद्धि के अनुपात में वित्तीय मदद बहुत कम, बदलाव की मांग

क्लाइमेट फाइनेंस जलवायु परिवर्तन से जंग में सबसे महत्वपूर्ण है। कॉप27 में माना गया कि

लॉस एंड डैमेज फंड की स्थापना लेकिन जीवाश्म ईंधन की कटौती से मुकरे देश

कई उतार-चढ़ाव देखने के बाद आखिर शर्म-अल-शेख में वह एकमात्र बड़ी कामयाबी हो पाई जिसकी

कॉप27 में ऐतिहासिक फैसला, गठित हुआ लॉस एंड डैमेज फंड; लेकिन यूरोपीय देशों ने की विकासशील देशों को बांटने की कोशिश

शर्म-अल-शेख में सम्पन्न हुए जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप-27) में आखिरकार जलवायु आपदाओं से लड़ने के

“जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में हमारी नज़र विकसित देशों पर है जो अपने वादों से पीछे हट रहे हैं”

मालदीव, मॉरीशस, फिजी, बारबाडोस सहित 39 छोटे द्वीप देशों से बने लघु द्वीपीय देशों के

‘भारत को (अंतर्राष्ट्रीय मंच पर) जस्ट-ट्रांजिशन के मुद्दे से भागने की ज़रूरत नहीं है’

आज भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से जुड़ी है बिजली की मांग। भारत को